DA Hike List – देशभर में केंद्रीय सरकार के अधीन कार्यरत लाखों कर्मचारियों और सेवानिवृत्त पेंशनधारियों के लिए एक महत्वपूर्ण समाचार सामने आया है। महंगाई भत्ता जिसे डीए के नाम से जाना जाता है, वह जनवरी 2026 में पचास फीसदी के महत्वपूर्ण स्तर को छू गया है। यह केवल एक आंकड़ा भर नहीं है बल्कि यह एक निर्णायक मोड़ है जो वेतन व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की ओर इशारा करता है। जब भी यह भत्ता इस सीमा रेखा तक पहुंचता है तो इसे बेसिक सैलरी में जोड़ने की चर्चा स्वाभाविक रूप से गति पकड़ लेती है।
विगत कुछ वर्षों से देश में बढ़ती हुई महंगाई की दर को देखते हुए सरकार समय-समय पर डीए में इजाफा करती आई है। अब जबकि यह आधी सैलरी के बराबर हो चुका है, तो कर्मचारी वर्ग इसके मूल वेतन में समावेश की प्रबल अपेक्षा रखता है। यह विलय न सिर्फ उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा बल्कि अन्य सुविधाओं में भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
कर्मचारी यूनियनों की जोरदार मांग
विभिन्न कर्मचारी संघों और यूनियनों ने डीए को बेसिक पे में मिलाने की मांग को अत्यंत गंभीरता से उठाया है। उनका तर्क बिल्कुल स्पष्ट है कि जब इस भत्ते को मूल वेतन का हिस्सा बनाया जाएगा तो कर्मचारियों की समग्र आय में स्थायी इजाफा होगा। साथ ही पेंशनभोगियों की पेंशन राशि में भी ठोस बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। हालांकि आठवें पे कमीशन के गठन को लेकर कर्मचारियों में असंतोष की लहर भी दिख रही है।
इस असंतोष का प्रमुख कारण यह है कि कर्मचारी वर्ग की अनेक उचित अपेक्षाओं को अभी तक आयोग की संदर्भ शर्तों में शामिल नहीं किया गया है। कर्मचारी महसूस करते हैं कि उनकी बात पर उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जनवरी 2026 में यह नाराजगी विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त हो रही है जिसमें प्रदर्शन, धरना और सरकार को ज्ञापन सौंपना शामिल है।
मूल वेतन में विलय से मिलने वाले फायदे
महंगाई भत्ता केंद्र सरकार द्वारा अपने कर्मियों को बढ़ती महंगाई से राहत प्रदान करने के लिए दिया जाने वाला अतिरिक्त लाभ है। जब यह पचास फीसदी तक पहुंच जाता है तो इसका बेसिक सैलरी में समावेश करने से व्यापक और दीर्घकालीन फायदे होते हैं। यदि सरकार यह फैसला लेती है तो सबसे पहला असर यह होगा कि कर्मचारियों का मूल वेतन स्वतः ही काफी बढ़ जाएगा।
मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी बीस हजार रुपये प्रति माह है। पचास प्रतिशत डीए मिलाने पर उसका मूल वेतन दस हजार रुपये बढ़कर तीस हजार रुपये हो जाएगा। यह लगभग पचास प्रतिशत की प्रत्यक्ष वृद्धि है जो अत्यंत लाभकारी है। यह गणना प्रत्येक श्रेणी के कर्मचारियों पर एक समान लागू होगी चाहे वे किसी भी पद पर कार्यरत हों।
सहायक भत्तों में भी होगी बढ़ोतरी
मूल वेतन में यह वृद्धि केवल प्रत्यक्ष लाभ तक ही सीमित नहीं रहेगी। सरकारी वेतन संरचना में अधिकतर भत्तों की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के आधार पर होती है। इसलिए जैसे ही बेसिक सैलरी में इजाफा होगा, सभी संबंधित भत्तों में भी आनुपातिक वृद्धि स्वतः हो जाएगी। मकान किराया भत्ता यानी एचआरए, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और अन्य अनेक लाभ बेसिक पे पर आधारित होते हैं।
जब मूल वेतन में इजाफा होगा तो इन सभी महत्वपूर्ण आर्थिक सुविधाओं में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। पेंशनभोगियों के लिए भी यह परिवर्तन अत्यंत हितकर होगा क्योंकि उनकी मूल पेंशन की राशि बढ़ेगी जिससे महंगाई राहत भी बढ़ेगा। इस निर्णायक कदम से लगभग सवा करोड़ से अधिक कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को सीधा और व्यापक वित्तीय लाभ मिलने की प्रबल संभावना है।
आठवें वेतन आयोग को लेकर नाराजगी
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली बैठक में आठवें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम है किंतु देशभर के कर्मचारी संघ इस आयोग की संदर्भ शर्तों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। वे अपनी अनेक गंभीर और न्यायसंगत मांगों को लेकर तीव्र असंतोष प्रकट कर रहे हैं।
कर्मचारी संगठनों की प्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण मांग यह है कि डीए मर्जर के मुद्दे को तत्काल संबोधित किया जाए। उनकी स्पष्ट अपेक्षा है कि पहली जनवरी 2026 से आठवां वेतन आयोग प्रभावी होना चाहिए और साथ ही पचास प्रतिशत तक पहुंचे महंगाई भत्ते को तुरंत बेसिक पे में मिला दिया जाना चाहिए। यह मांग मात्र कुछ संगठनों की नहीं अपितु लगभग समस्त प्रमुख कर्मचारी यूनियनों की सामूहिक मांग है।
अन्य प्रमुख अपेक्षाएं
डीए मर्जर के अतिरिक्त कर्मचारी संगठनों की कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी हैं। दूसरी बड़ी मांग पुरानी पेंशन योजना को पुनः लागू करने की है। कर्मचारी लगातार यह कह रहे हैं कि ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से शुरू किया जाए क्योंकि नई योजना में अनिश्चितता और जोखिम का तत्व अधिक है। तीसरी अहम मांग कोरोना काल में रोके गए डीए की किस्तों से संबंधित है।
महामारी के दौरान लगभग अठारह महीनों तक महंगाई भत्ते की बढ़ोतरी स्थगित कर दी गई थी। कर्मचारी संघ जोरदार ढंग से मांग कर रहे हैं कि उस अवधि की रोकी गई किस्तों का बकाया भुगतान किया जाए। चौथी मांग पेंशन के कम्यूटेड हिस्से की बहाली से जुड़ी है। वर्तमान में जो कम्यूटेड पेंशन ली जाती है वह पंद्रह वर्षों बाद बहाल होती है परंतु कर्मचारी चाहते हैं कि इसे ग्यारह वर्ष में बहाल किया जाए।
लागू होने की संभावित अवधि
आठवें वेतन आयोग के गठन को औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है जिससे लगभग पचास लाख केंद्रीय कर्मचारियों और उनसठ लाख पेंशनधारियों को फायदा होगा। परंतु आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के वास्तविक क्रियान्वयन में काफी समय लगता है। पूर्व के वेतन आयोगों के अनुभवों से पता चलता है कि आयोग को अपनी अनुशंसाएं बनाने, सरकार द्वारा उन पर विचार करने और अंततः लागू होने में सामान्यतः अठारह से चौबीस माह का समय लगता है।
इसी आधार पर जानकारों का अनुमान है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 2027 के मध्य या 2028 के प्रारंभ तक लागू हो सकती हैं। हालांकि कर्मचारी चाहते हैं कि यह प्रक्रिया शीघ्रातिशीघ्र पूर्ण हो और उन्हें जल्द से जल्द इसका लाभ मिलना शुरू हो जाए।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
महंगाई भत्ते का बेसिक सैलरी में समावेश केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि इसका व्यापक आर्थिक असर होगा। जब करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आय में वृद्धि होती है तो उनकी क्रय क्षमता बढ़ती है। बढ़ी हुई क्रय शक्ति से बाजार में मांग में इजाफा होता है जिससे व्यापार और उद्योग जगत को गति प्राप्त होती है। यह समग्र अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
साथ ही सरकारी कर्मियों का मनोबल बढ़ेगा जिससे प्रशासनिक कार्यों में सुधार देखने को मिलेगा। हालांकि सरकारी खजाने पर भी इसका भार पड़ेगा क्योंकि वेतन बिल में भारी बढ़ोतरी होगी। इसलिए सरकार को यह निर्णय लेते समय वित्तीय पहलुओं का भी समुचित ध्यान रखना होगा और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा।
महंगाई भत्ते का पचास प्रतिशत के स्तर तक पहुंचना वास्तव में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है और इसे मूल वेतन में शामिल करने की मांग तर्कसंगत एवं न्यायोचित है। यह कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करेगा। हालांकि अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में है और सभी को धैर्यपूर्वक आधिकारिक घोषणा की प्रतीक्षा करनी चाहिए। कर्मचारी संगठनों को भी रचनात्मक संवाद के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए ताकि सभी पक्षों के हितों का संरक्षण हो सके।









