Contract Employees – हरियाणा प्रदेश में कार्यरत संविदा आधार पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए एक अत्यंत सुखद समाचार सामने आया है। राज्य सरकार ने इन कर्मियों के वेतन ढांचे में व्यापक परिवर्तन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह संशोधन विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों तथा सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत अंशकालिक एवं दैनिक मजदूरी पर काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा। इस निर्णय से प्रदेश भर में कार्यरत हजारों संविदा कर्मियों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।
राज्य के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के हस्ताक्षर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में इस संशोधित वेतन संरचना की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय प्रदेश के विभिन्न विभागों और संगठनों की ओर से लंबे समय से प्राप्त हो रही मांगों को देखते हुए लिया गया है। संविदा कर्मियों द्वारा लगातार उचित वेतन की मांग की जा रही थी, जिसे अब सरकार ने स्वीकार कर लिया है।
नवीन वेतन व्यवस्था की प्रभावी तिथि
संशोधित वेतन ढांचा 1 जनवरी 2025 से औपचारिक रूप से लागू हो जाएगा। इसका अर्थ यह है कि जनवरी माह से ही कर्मचारियों को बढ़ी हुई दरों के अनुसार भुगतान प्राप्त होना प्रारंभ हो जाएगा। सरकार ने यह भी आश्वासन दिया है कि यदि कार्यान्वयन में किसी प्रकार की देरी होती है, तो पिछले बकाया राशि का भुगतान एरियर के रूप में किया जाएगा। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि किसी भी कर्मचारी को उसके वैध अधिकार से वंचित न रहना पड़े।
महंगाई के इस दौर में जीवन यापन की बढ़ती लागत को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय अत्यंत समयोचित और स्वागत योग्य है। संविदा कर्मचारी जो अपने परिवार का भरण-पोषण इसी आय से करते हैं, उनके लिए यह वेतन वृद्धि एक बड़ी राहत साबित होगी।
जिलों का वैज्ञानिक वर्गीकरण
हरियाणा सरकार ने इस वेतन संशोधन में एक अत्यंत तर्कसंगत और न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया है। प्रदेश के विभिन्न जिलों की सामाजिक, आर्थिक एवं विकासात्मक स्थिति में व्याप्त अंतर को ध्यान में रखते हुए इन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। यह वर्गीकरण इस सिद्धांत पर आधारित है कि विभिन्न क्षेत्रों में जीवन यापन की लागत भिन्न-भिन्न होती है।
इस वर्गीकरण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक जिले में कार्यरत कर्मचारियों को उस क्षेत्र की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप उचित मुआवजा प्राप्त हो। महानगरीय क्षेत्रों में जहां रहन-सहन का खर्च अधिक है, वहां कर्मचारियों को तुलनात्मक रूप से अधिक वेतन मिलेगा।
श्रेणी एक के जिलों के लिए संशोधित दरें
श्रेणी एक में सम्मिलित जिलों के लिए वेतन दरें सबसे उच्च निर्धारित की गई हैं। इस श्रेणी में आने वाले जिले प्रदेश के सर्वाधिक विकसित और आर्थिक रूप से समृद्ध क्षेत्र माने जाते हैं। लेवल एक के कर्मचारियों को अब 19,900 रुपये मासिक अथवा 765 रुपये प्रतिदिन की दर से वेतन प्राप्त होगा। प्रति घंटे की गणना के आधार पर यह दर उचित और संतोषजनक है।
लेवल दो पर कार्यरत कर्मियों के लिए मासिक वेतन 23,400 रुपये निर्धारित किया गया है, जो दैनिक आधार पर 900 रुपये के बराबर है। यह उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाती है कि सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के प्रति कितनी गंभीर है। लेवल तीन के कर्मचारियों को सर्वाधिक लाभ होगा, जिन्हें 24,000 रुपये मासिक अथवा 927 रुपये दैनिक दर से भुगतान किया जाएगा।
श्रेणी दो के अंतर्गत आने वाले जिलों की व्यवस्था
श्रेणी दो में वे जिले सम्मिलित हैं जो विकास के मामले में मध्यम स्तर पर हैं। इन क्षेत्रों में रहन-सहन का खर्च श्रेणी एक की तुलना में कुछ कम है, इसलिए वेतन दरें भी तदनुसार निर्धारित की गई हैं। लेवल एक के श्रमिकों को यहां 17,550 रुपये मासिक वेतन प्राप्त होगा। दैनिक गणना के अनुसार यह राशि 675 रुपये होगी और प्रति घंटे की दर 84 रुपये रखी गई है।
लेवल दो पर नियुक्त कर्मचारियों के लिए मासिक वेतन 21,000 रुपये निर्धारित किया गया है। दैनिक आधार पर इन्हें 800 रुपये तथा प्रति घंटे 101 रुपये का भुगतान किया जाएगा। यह दरें कर्मचारियों की योग्यता और अनुभव को उचित मान्यता प्रदान करती हैं। लेवल तीन के कर्मियों को 21,700 रुपये मासिक अथवा 835 रुपये दैनिक दर से वेतन मिलेगा।
श्रेणी तीन के जिलों के लिए विशेष प्रावधान
श्रेणी तीन में प्रदेश के वे जिले शामिल हैं जो विकास की दृष्टि से अपेक्षाकृत पिछड़े हुए माने जाते हैं। यद्यपि इन क्षेत्रों में वेतन दरें अन्य श्रेणियों से कम हैं, फिर भी पूर्व की तुलना में इनमें पर्याप्त वृद्धि की गई है। लेवल एक के कर्मचारियों को 16,250 रुपये मासिक अथवा 625 रुपये दैनिक दर से भुगतान होगा। यह राशि उस क्षेत्र की आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप उचित और संतुलित है।
लेवल दो पर कार्यरत कर्मियों के लिए 19,800 रुपये मासिक वेतन तय किया गया है, जो दैनिक आधार पर 762 रुपये के बराबर होता है। लेवल तीन के कर्मचारियों को 20,450 रुपये मासिक अथवा 787 रुपये प्रतिदिन की दर से राशि प्राप्त होगी। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि प्रत्येक क्षेत्र के कर्मचारियों को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार उचित पारिश्रमिक मिले।
निर्णय का व्यापक प्रभाव और महत्व
यह निर्णय केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संविदा कर्मचारियों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है। लंबे समय से ये कर्मचारी अपने श्रम का उचित मूल्य प्राप्त करने के लिए संघर्षरत थे। विभिन्न विभागों और संगठनों से आई मांगों को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने यह सराहनीय कदम उठाया है।
इस संशोधन से न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि उनके मनोबल में भी वृद्धि होगी। जब कर्मचारियों को उचित वेतन और सम्मान प्राप्त होता है, तो उनकी कार्यक्षमता और उत्पादकता में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है। यह अंततः सरकारी विभागों की सेवा गुणवत्ता में भी सुधार लाएगा।









