CBSE Board Exam New Update – शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव आने वाला है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने वर्ष 2026 से कक्षा दसवीं की बोर्ड परीक्षाओं में क्रांतिकारी बदलाव करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक नया अध्याय खोलने जा रहा है। बोर्ड की इस नई पहल का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों पर परीक्षा के दौरान पड़ने वाले मानसिक दबाव को कम करना और उन्हें अपनी क्षमता सुधारने का दूसरा अवसर प्रदान करना है।
नई परीक्षा प्रणाली की मुख्य विशेषताएं
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होने वाली इस नई व्यवस्था के तहत दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को दो अलग-अलग चरणों में परीक्षा देने का विकल्प मिलेगा। फरवरी माह से इन परीक्षाओं का आयोजन प्रारंभ होगा। पहले चरण की परीक्षा संपन्न होने के बाद जो विद्यार्थी अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं होंगे, वे दूसरे चरण में पुनः परीक्षा दे सकेंगे। यह प्रणाली विद्यार्थियों को अपनी गलतियों से सीखने और बेहतर परिणाम प्राप्त करने का सुनहरा अवसर देगी।
सीबीएसई के अध्यक्ष राहुल सिंह ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह परिवर्तन शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड की संयुक्त योजना का हिस्सा है। इस नीति को तैयार करने से पूर्व शिक्षकों, शिक्षा विशेषज्ञों और संबंधित विभागों से व्यापक परामर्श लिया गया है। प्राप्त सुझावों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा प्रणाली को अधिक व्यावहारिक और विद्यार्थी केंद्रित बनाया गया है।
मार्कशीट में आधुनिक बदलाव
नई परीक्षा व्यवस्था के साथ-साथ मार्कशीट के प्रारूप में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। बोर्ड द्वारा तैयार किए गए नए ड्राफ्ट के अनुसार, दूसरे चरण की परीक्षा समाप्त होने के उपरांत ही विद्यार्थियों को औपचारिक मुद्रित मार्कशीट प्रदान की जाएगी। पहले चरण के बाद केवल अंकों का विवरण दिया जाएगा, जिसके आधार पर कक्षा ग्यारहवीं में अस्थायी प्रवेश लिया जा सकता है। यह व्यवस्था विद्यार्थियों को उनकी शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने में सहायता करेगी।
नई मार्कशीट में कई विशेष जानकारियां सम्मिलित की जाएंगी। आंतरिक मूल्यांकन के अंक स्पष्ट रूप से अंकित होंगे। पहले और दूसरे चरण दोनों परीक्षाओं में प्राप्त अंकों का विस्तृत विवरण दिया जाएगा। प्रत्येक विषय के लिए पृथक स्तंभ में अंतिम स्कोर दर्शाया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों परीक्षाओं में से जिसमें भी विद्यार्थी का प्रदर्शन बेहतर होगा, उसी को अंतिम परिणाम के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
पंजीकरण की प्रक्रिया
दूसरे चरण की परीक्षा में सम्मिलित होने के इच्छुक विद्यार्थियों को नवीन पंजीकरण करना आवश्यक होगा। पहले चरण का परिणाम घोषित होने के पश्चात बोर्ड एक अलग पंजीकरण विंडो खोलेगा। केवल वे विद्यार्थी जो अपने अंकों में सुधार चाहते हैं, इस प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। यह व्यवस्था पूर्णतः स्वैच्छिक है। विद्यार्थियों को इस बात की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है कि यदि दूसरे चरण में उनके अंक कम आते हैं, तो पहले चरण के अंक ही मान्य होंगे।
विद्यार्थियों को मिलने वाले लाभ
यह नई प्रणाली विद्यार्थियों के लिए अनेक प्रकार से लाभकारी सिद्ध होगी। परीक्षा का मानसिक दबाव काफी हद तक कम होगा क्योंकि विद्यार्थियों को पता होगा कि उन्हें सुधार का एक और अवसर मिलेगा। जो विद्यार्थी पहली बार में अपनी वास्तविक क्षमता प्रदर्शित नहीं कर पाते, वे दूसरे प्रयास में बेहतर कर सकेंगे। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन विद्यार्थियों के लिए वरदान साबित होगी जो परीक्षा के समय किसी स्वास्थ्य समस्या या अन्य कठिनाई का सामना कर रहे होते हैं।
मूल्यांकन प्रणाली में लचीलापन आने से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। विद्यार्थी अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काम कर सकेंगे। शिक्षक भी पहले चरण के परिणामों का विश्लेषण करके विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे। यह व्यवस्था सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाएगी।
कक्षा बारहवीं के लिए भविष्य की योजनाएं
कक्षा बारहवीं की परीक्षाओं को लेकर अभी कोई निश्चित घोषणा नहीं की गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में केवल दसवीं कक्षा में ही दो चरणों की परीक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। दसवीं की इस नई प्रणाली से प्राप्त अनुभव और प्रतिक्रियाओं का मूल्यांकन करने के बाद ही बारहवीं कक्षा के लिए इसी तरह की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय सावधानीपूर्वक इस परिवर्तन को लागू करना चाहता है ताकि किसी प्रकार की कठिनाई न हो।
प्रवेश प्रक्रिया में समायोजन
ग्यारहवीं कक्षा में प्रवेश की प्रक्रिया को नई परीक्षा व्यवस्था के अनुरूप संशोधित किया जाएगा। पहले चरण के परिणाम के आधार पर विद्यार्थियों को अस्थायी प्रवेश दिया जाएगा। दूसरे चरण का परिणाम आने के बाद अंतिम प्रवेश की पुष्टि की जाएगी। बोर्ड द्वारा इस संबंध में शीघ्र ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे जिससे विद्यालयों और विद्यार्थियों दोनों को स्पष्टता मिल सके।









