Land Registration Rule 2026 – देश में अचल संपत्ति के पंजीयन से जुड़े कायदे-कानूनों में जल्द ही बड़े परिवर्तन होने वाले हैं। आगामी वर्ष 2026 से ये नियम लागू होंगे और इनका सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो घर-जमीन अपने घर की महिलाओं के नाम से खरीदते हैं। अब तक भारत में यह रिवाज चला आ रहा था कि लोग टैक्स में राहत पाने, रजिस्ट्री के खर्च में बचत करने या भविष्य की चिंता से मुक्त रहने के लिए अपनी पत्नी, बेटी या मां के नाम से संपत्ति का स्वामित्व ले लेते थे। लेकिन अब सिर्फ नाम लिखवा देना काफी नहीं होगा।
नई व्यवस्था के मुताबिक अब यह जरूरी होगा कि जिस महिला के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर हो रही है, उस खरीद में उसका असली आर्थिक योगदान साबित करना होगा। यह बदलाव संपत्ति के असली और नकली मालिकों में अंतर स्पष्ट करने के मकसद से लाया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रॉपर्टी डील में धोखाधड़ी खत्म हो और सभी लेनदेन पूरी तरह पारदर्शी हों।
क्यों जरूरी हो गया यह कानूनी सुधार
पिछले कई सालों से यह समस्या बनी हुई थी कि कागजों में तो संपत्ति महिलाओं के नाम दिखती थी, लेकिन असल में फैसले और मालिकाना हक पुरुष सदस्यों के पास रहता था। महिलाओं का काम बस दस्तखत कर देने भर का होता था। इस तरीके का इस्तेमाल करके लोग टैक्स से बचते थे और काले धन को सफेद करने की कोशिश करते थे।
इसके अलावा जब परिवार में कोई अलगाव, झगड़ा या किसी की मौत हो जाती थी, तब संपत्ति को लेकर बड़े-बड़े मुकदमे शुरू हो जाते थे जो सालों-साल चलते रहते थे। कोर्ट में ऐसे हजारों केस अभी भी लटके पड़े हैं। इन्हीं दिक्कतों को खत्म करने और सिस्टम में साफगोई लाने के लिए यह नया कानून बनाया गया है।
पैसों के सोर्स की जांच जरूरी
नए कानून के तहत अगर कोई अपनी पत्नी, बेटी या घर की किसी महिला के नाम पर जमीन-मकान ले रहा है, तो रजिस्ट्री के वक्त यह दिखाना पड़ेगा कि उस महिला ने प्रॉपर्टी खरीदने में असल में पैसे लगाए हैं। रजिस्ट्रार ऑफिस में पूरी डिटेल देनी होगी कि पेमेंट किसके अकाउंट से हुआ, वह पैसा किसकी कमाई का है और इसके क्या सबूत हैं।
अगर जांच में पता चलता है कि महिला सिर्फ कागजी मालकिन है और असली मालिक कोई और है, तो रजिस्ट्री रद्द हो सकती है। ऐसी हालत में बेनामी प्रॉपर्टी कानून के तहत सख्त एक्शन भी लिया जा सकता है, जिसमें संपत्ति जब्त करना और भारी जुर्माना शामिल है।
रजिस्ट्रार दफ्तरों में सख्ती
पहले प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक आम फॉर्मैलिटी थी जहां कुछ पेपर जमा करके काम हो जाता था। मगर अब रजिस्ट्रार ऑफिस के अफसरों की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है। वे इनकम सोर्स, बैंक की पूरी डिटेल, टैक्स रिटर्न और पेमेंट के तरीके की गहराई से पड़ताल करेंगे।
अगर किसी भी मोड़ पर उन्हें कोई शंका होती है, तो वे रजिस्ट्रेशन रोक सकते हैं और ज्यादा कागजात मांग सकते हैं। यानी अब बिना पूरी तैयारी और सही डॉक्यूमेंट्स के प्रॉपर्टी रजिस्टर करवाना मुश्किल होगा। लोगों को पहले से ही सारे जरूरी पेपर्स इकट्ठा करने होंगे।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन सिस्टम
सरकार ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आधुनिक बनाते हुए इसे काफी हद तक डिजिटल कर दिया है। आधार, पैन, बैंक रिकॉर्ड और इनकम से जुड़े कागजातों की ऑनलाइन जांच होगी। कंप्यूटर सिस्टम अपने आप चेक करेगा कि बताई गई इनकम से प्रॉपर्टी खरीदना मुमकिन है या नहीं।
बड़े सौदों में अधिकारी जगह पर जाकर इंस्पेक्शन भी कर सकते हैं। डिजिटल रिकॉर्ड की मदद से यह साफ हो जाएगा कि महिला की भागीदारी वास्तविक है या सिर्फ दिखावे की। यह तकनीक फ्रॉड और गैरकानूनी काम पर लगाम लगाने में बेहद कारगर साबित होगी।
महिलाओं को मिलेगा असली हक
इन नियमों का सबसे ज्यादा फायदा उन महिलाओं को होगा जो सचमुच अपनी मेहनत की कमाई या जमा पूंजी से संपत्ति खरीदती हैं। अब उनका मालिकाना हक मजबूत और कानूनी तौर पर संरक्षित रहेगा। भविष्य में अगर कोई विवाद होता है तो उनके पास पुख्ता सबूत मौजूद होंगे।
यह सिस्टम महिलाओं की आर्थिक आजादी को प्रोत्साहन देगा और उन्हें सिर्फ नाम की नहीं बल्कि हकीकत में मालिक का दर्जा मिलेगा। यह कदम जेंडर इक्वलिटी की दिशा में अहम उपलब्धि है और महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों की सुरक्षा देता है।









